
पुसद (प्रतिनिधी वसीम खान), 17 जून 2025 –
“पसीना बहाकर कमाओ, और बैंक में जाकर जलील हो जाओ!” — जी हाँ, यही हकीकत बनती जा रही है उन आम लोगों की, जो ईमानदारी से कमाई गई रकम को बैंक में जमा कर सुरक्षित समझते हैं। मगर अब बैंक की मशीनें नोटों को नकली बताकर न केवल उन्हें जब्त कर रही हैं, बल्कि जनता को बिना कसूर ही अपराधी जैसा महसूस कराया जा रहा है।
ताज़ा मामला सामने आया है बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पुसद शाखा से, जहां स्थानीय नागरिक वसीम खान जब कुछ रक़म जमा कराने पहुँचे, तो मशीन ने ₹500 और ₹100 के दो नोटों को फौरन नकली घोषित कर दिया।
❗ जब्त किए गए नोटों की जानकारी:
₹500 का नोट: 5TN 896864
₹100 का नोट: 3BT 201818
बैंक द्वारा दी गई पावती में साफ लिखा है कि मशीन जांच में दोनों नोट फेल हो गए और उन्हें स्थायी रूप से जब्त कर लिया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठता है — आख़िर गुनाह किसका है?
🚨 आम जनता को ही क्यों भुगतना पड़े जुर्म?
क्या कोई आम इंसान हर लेन-देन पर माइक्रोस्कोप लेकर बैठे? या हर दुकान से नोट लेकर आने पर फॉरेंसिक टेस्ट कराए?
नकली नोट बाज़ार में कैसे और कहाँ से आते हैं — ये न बैंक को पता, न सरकार को, लेकिन जब वही नोट गलती से आम आदमी की जेब में आ जाए, तो उसकी जेब ही काट दी जाती है!
🤯 मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक शर्मिंदगी
ऐसे मामलों में ग्राहक को सिर्फ़ पैसे का नुकसान नहीं होता — वो खुद को शर्मिंदा, बेइज्ज़त और मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस करता है।
“बैंक वाले हमें यूं देखते हैं जैसे हम ही नोट छापकर लाए हों!” — ऐसा कहना है एक और पीड़ित ग्राहक का।
🔍 नियम तो हैं… मगर न्याय कहाँ है?
भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशों के मुताबिक, नकली नोट मिलने पर बैंक उसे जब्त करता है और कोई मुआवज़ा नहीं दिया जाता।
लेकिन जब कोई ग्राहक अनजाने में ऐसा नोट लेकर आता है, तो क्या उसे चोर करार देना जायज़ है?
अब वक्त आ गया है कि सरकार और बैंकिंग सिस्टम इस गंभीर मुद्दे पर ठोस नीति बनाए।
क्योंकि नकली नोट छापने वाले तो खुले घूमते हैं, और आम आदमी… चुपचाप अपनी कमाई से हाथ धो बैठता है।
